महिला समूह के द्वारा गांव के लोगों को किस तरह से आगे लाने का प्रयास कर रहे है आइए जान

 आप सभी भली-भांति जान रहे हैं कि, अभी महिला समूह सभी कार्य को करने के लिए सक्षम हो गए हैं।

 चाहे वह खाद बनाने के रूप में हो या गांव के लोगों के  किसान लोगों को फसल के प्रति  जागरूक करना हो  और साथ-साथ समूह की महिलाएं गांव के सभी लोगों को उद्योग के प्रति  जागरूक कर  सक्षम बनाने की प्रयास में लगे रहते हैं।  आप सभी जान रहें हैं की आज महिला समूह सभी कार्यों में आगे बढ़ चुके हैं और साथ ही साथ  गांव के लोगो को आगे बढ़ने की सलाह भी देते हैं। 

 हमने कोरबा जिला के अंतर्गत आने वाला  कापुबहरा ग्राम  जहां  सुख कुंवर

 बजरंग समूह की महिला सुख कुंवर

निवास करती हैं जिनका उम्र 45 साल है उन्होंने हमें  बताएं कि  वे समूह में लगभग 6 सालों से काम कर रही हैं।  जिन्होंने हमें बताया कि जब बिहान योजना 2005 में लागू किया गया है  उन्होंने  हमें बताएं कि वह पहले  किसी भी तरह के  संबंधित कार्य के बारे में नहीं जानते थे और ना उसके बारे में कभी सुने थे  और कहां जाए तो उनके पास किसी भी तरह का रोजगार  नहीं हुआ था वे मेहनत मजदूरी करके अपना जीवन चलाते  थे ,लेकिन जब से वह बिहान योजना में  सदस्य के रूप में कार्यरत हैं ।तब से वह अपने लिए और दूसरों के लिए रोजगार स्थापित करने का प्रयत्न करते हैं। जो गांव में ही संभव हो सके,  जैसे कि गांव के लोगों को

लाख उत्पादन  करने के लिए भी प्रोत्साहित करना ,खाद  तैयार करना,  सब्जी बाड़ी तैयार कर  उद्योग स्थापित करना ।  उन्होंने हमें  बताएं कि, उनके गांव में लगभग 20%  पटेल समूह के लोग रहते  हैं जो सब्जी मंडी कर अपना जीवन यापन करते हैं  ।  जिन्हें खाद के बारे में सबसे ज्यादा प्रशिक्षण दिया गया है।

 पौड़ी ब्लाक के अंतर्गत आने वाले सभी गांव  जहां, महिला समूह के द्वारा महिलाओं को व किसान भाइयों को सभी तरह का प्रशिक्षण दिया जा रहा है  और उस प्रशिक्षण का लाभ स्वयं महिला समूह भी ले रहे हैं।  आप सभी ने सुना होगा कि महिला समूह  गांव के किसानों को ऐसे बहुत से प्रशिक्षण दे रहे हैं। जो उनके दैनिक जीवन के लिए बहुत ही ज्यादा उपयोगी माना गया है जैसे कि  जैविक   खाद बनाना  और जैविक खाद बनाकर उसे  उचित मूल्य में बेचना ,इन सभी चीजों के बारे में प्रशिक्षण दिया जाता है  जिसके माध्यम से वह अपने लिए रोजगार स्थापित कर सके। उसी तरह लाख उत्पादन  कैसे किया जाता है इसके बारे में भी गांव के लोगों को समूह के द्वारा बताया जा रहा है ताकि लाख उत्पादन करने में कोई भी तरह की  दिक्कतें ना हो  साथ ही साथ लाख बिक्री कर  आमदनी कमा सकें  । देखा होगा कि महिला समूह की जो महिलाएं होती है वह हमेशा सुर्खियों में ही रहती हैं चाहे  खुद काम कर रहे हो या गांव के लोगों को प्रशिक्षण दे रहे हो।  गांव के लोगों को सभी तरह के प्रशिक्षण देकर उनके रोजगार स्थापित करने में मदद कर रही हैं।

पहले सबसे ज्यादा  महिला समूह की महिलाएं खाद उत्पादन  करने में सबसे ज्यादा जोर दे  रहे थे ।और आज   गांव के लोगों को खाद कैसे बनाया जाता है इसमें भी चर्चा करते हैं और उन्हें प्रशिक्षण देते हैं ।ताकि वह खाद बनाकर उसे बिक्री भी कर सके   जिसे कुछ अच्छा खासा आमदनी भी प्राप्त हो जाए और आज गांव के लोग 

 गांव में ही  तरह-तरह के उद्योग स्थापित कर अपना जीवन चलाने में सक्षम हो रहे हैं ।

 आइए हम ऐसे गांव के बारे में बात करते हैं जहां  महिला समूह से प्रशिक्षण लेकर लाख उत्पादन कर रहे हैं  


आप सभी जान रहे हैं कि ,सभी गांव में  महिला समूह का गुट बनाया  गया है   समूह की महिलाओं का काम है सभी लोगों को सभी कामों के लिए प्रोत्साहित करना । उन्होंने हमें बताया कि बजरंग समूह के द्वारा  कापुबाहरा और आस पास के सभी गांव 

व लगभग 7-8 ग्रामों को  प्रशिक्षण दे चुके हैं।और आज वह स्वयं  के द्वारा अपने लिए उपयोगी सामान निर्मित कर रहे हैं । अगर हम कापू बाहर की ही बात करें तो महिला समूह के महिलाओ के द्वारा  लड़कियों के लिए सेनेटरी पैड  भी  वितरण  कर रहे हैं। 


 आइए जाने महिला समूह की महिलाएं किस तरह से गांव के लोगों को  क्या-क्या प्रशिक्षण देते हैं

 समूह की महिलाएं वैसे तो सभी तरह के प्रशिक्षण देते हैं चाहे वह खाद के बारे में हो या ब्रह्मास्त्र के बारे में हो या 


लाख उत्पादन

लाख उत्पादन करने के बारे में हो  जब गांव में फसल तैयार की जाती है ,तो गांव के किसानों को महिलाओं के द्वारा प्रशिक्षण दिया जाता है  और अब तरह तरह के खाद के बारें में बताते हैं अब फसल कटने के बाद गांव के महिला व पुरुषों को लाख उत्पादन करने का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। और वह सिर्फ एक ही गांव में नहीं बल्कि सभी गांव के समूह की महिलाएं   सभी लोगों को लाख उत्पादन कैसे  किया जाता है इसके बारे में जानकारी दे रही है। 

 अगर हम इस साल के किसानों के फसल के उत्पादन के बारे में अगर हम बात करें तो , इस साल किसानों को काफी  अच्छा खासा फसल प्राप्त हुआ है । किसानों ने हमें बताया कि वह महिला समूह के द्वारा दिए  गया प्रशिक्षण के माध्यम से ही फसल लगाए थे।  जिसे  श्री विधि कृषि भी कहा जाता है  श्री विधि   कृषि एक ऐसी कृषि होती है जिसमें एक लाइन


 के कतारों में   फसल लगाकर खेती की जाती   लाइन विधि से खेती  गौठान में भी की जाती है।    जिससे अच्छा खासा फसल भी प्राप्त होता है। महिला समूह की महिलाओं का कहना है कि श्री विधि  की खेती सभी किसानों को करनी चाहिए जिससे फसल के उत्पादन में बढ़ोतरी हो  और लगातार अभी तीन-चार सालों से श्री विधि की खेती कर फसलों के उत्पादन में किसान बढ़ोतरी कर रहे हैं श्री विधि  में फसल 1 मीटर की दूरी में  लगाते हैं । जिससे उसकी उपजाऊ शक्ति और भी ज्यादा बढ़ जाती है और उस फसल को पोषक तत्व की प्राप्ति  अच्छी तरह से होती है , जिसे फसल उत्पादन बढ़ने का  कागार और भी ज्यादा बढ़ जाता है।  इस तरह  से समूह की महिलाएं स्वयं भी सभी  कार्यों में आगे बढ़ रहे हैं। साथ ही साथ गांव वालों को भी आगे लाने का प्रयास भी कर रहे हैं । 


 हम यह कर सकते हैं कि ,आज समूह की महिलाएं सभी कार्य को करने के लिए सक्षम हो चुके हैं और  और कोरबा जिला के अंतर्गत आने वाले सभी गांव के लोगों को  प्रशिक्षण देने में भी सक्षम हो रहे हैं। यह रोजगार की कमी को दूर करने का एक अच्छा साधन है और एक अच्छा प्रयास है।


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