वन धन मित्र के योजना के बारे में आइए जाने

 हमने ऐसे बहुत से योजनाओं के बारे में पढ़ा  होगा या सुना  होगा  जिसे  हम अपने दैनिक जीवन में  उपयोग भी किए हैं।  और सभी  लोग लाभ भी उठाये है  ,जो छत्तीसगढ़ में चल रही है  और यह स्कीम 2 जिलों में एक कवर्धा और एक कोरबा जिला में चल रही है ।इस  स्कीम के बारे में हम सभी लोगो को जानकारी  देने वाले हैं ,गांव के लोग ज्यादातर प्रकृति में रहकर जीवन यापन करने में सक्षम होते हैं। प्रकृति पर ही निर्भर रहते हैं।

 जंगलों के किनारे रहने वाले आदिवासियों के स्थिति  के सुधार के लिए ऐसे बहुत से योजनाएं तैयार की जा रही है ।जिसका फायदा   ग्रामीण के सभी लोग उठा सकते हैं, लेकिन सबसे ज्यादा फायदेमंद उन लोगों के लिए है जिनका प्रकृति पेड़ पौधे जंगल झाड़ी यही एकमात्र आय का साधन है।   शासन के द्वारा इस योजना को  तैयार करने का उद्देश्य यह है कि  ,लोग ज्यादा से ज्यादा वृक्षारोपण करें  और पेड़ पौधों के कटाई होने से बचाए ताकि उसके जो फल फूल है उसे बिक्री कर कुछ आमदनी कमा सके,  आय के साधन बनाने के साथ-साथ वे  सभी पेड़ पौधों की रक्षा कर सकें।  


 हमने कोरबा जिला के  पोंडी ब्लाक के अंतर्गत आने वाले ग्राम बिंझरा  जो शिव सेवक  

शिव सेवक


निवास करते है जिनका उम्र 45 वर्ष  है ,  जो कि एक वन परीक्षेत्र का  सदस्य हैं।  जिन्होंने हमें बताया कि हमारे कोरबा जिला के  वे सभी ग्राम जहां   वन धन मित्र का चयन किया गया है  ।जिनका कार्य समूह के सभी सदस्यों को जाकर आग्रह करना कि, गांव के सभी लोगों को  समूह के द्वारा बताया जाए कि  ,अब गांव में  वनांचल क्षेत्रों में कौन-कौन से फल फूल की खरीदारी होगी जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में कुछ सुधार हो सके।  समूह की महिलाएं  ग्रामीण के सभी  लोगों  के घर  जा जाकर  जंगल  से प्राप्त उपयोगी फल ,फूलों को खरीदारी करके  गांव में पदस्थ वन धन  मित्र को  बताना   हैं।  और गांव के सभी महिला एवं पुरुष को जागरूक कराना , ताकि ज्यादा  से ज्यादा वृक्षारोपण करें ।  पहले इन सभी कार्यों को समूह की महिलाओं के द्वारा किया जाता था। समूह की महिलाएं सभी के घर घर जाकर सभी लोगों को प्रोत्साहित करते थे । वनोपज में बीजों के संग्रहण करने के लिए ,समूह की महिलाएं   हॉट बाजार  का ठेका लेकर  साफ सफाई का काम भी  करते हैं  समूह के सभी महिलाओं को आगे लाने के लिए   वनोपज ने गांव में सभी  महिला समूह की मदद करने के लिए वन मित्र का  चयन किया  और वन  धन मित्र सिर्फ समूह की महिलाएं ही बन सकती है।  यह समूह में काम कर रही महिलाओं का  कोई एक व्यक्ति वन धन मित्र बन सकता है । इसके अलावा कोई और व्यक्ति नहीं बन सकता । इस वन धन मित्र को महीने में 1000 मानदेय भी दिया जाएगा  ,अगर वन धन  मित्र का काम अच्छा रहेगा तो  यह वन धन  मित्र का काम आगे सभी जिलों में  शुरू की जाएगी । आप सभी जान रहे हैं कि, महिला समूह अभी  सुर्ख़ियों में ही बने रहते हैं।  महिला समूह की महिलाये  बड़े-बड़े काम करके अग्रसर हो रही हैं ।  अब महुआ फूल



महुवा  फूल


चार फल 


फल बिनने के साथ-साथ गांव में  कोदो ,कुटकी,  की भी बिक्री होगी।

 आइए हम गांव के ही रहने वाले लोगों से कुछ चर्चा करते हैं, वन धन के बारे में 

 हमने  गांव के लोगों से चर्चा किये जिनसे हमें पता चला की वन धन  मित्र जो  जंगलों से प्राप्त वन लघु वन उपज को संग्रहण करके गांव में बनाए गए लघु वनोपज संग्रहण केंद्र पर उचित मूल्य में बेचकर राशि प्राप्त करना   और जनजातियों को  आर्थिक राशि सहायता प्रदान करना   ,भारत सरकार के   द्वारा यह योजना तैयार की गई है , इस योजना को वन धन मित्र के नाम से जाना जाता है। जिनका काम है ,गांव के सभी लोगों को  सभी फसलों और बीजों के बारे में बताना , जैसे कि आप सभी जान रहे , वनोपज एक ऐसी व्यवस्था है जिसके माध्यम से  जंगलों के किनारे बसे हुए लोगों को  जंगल से प्राप्त सभी बीज फूल के बारे में   बताना और उन्ही जनजातियों के द्वारा  उपयोगी वस्तु को  एकत्रित करके  उचित मूल्य में बेचना वन धन   और वन धन मित्र योजना के  द्वारा सभी जनजातियों को लाभ पहुंचाना। 


सभी जनजाति को लाभ पहुंचाने के साथ-साथ यह योजना रोजगार देने का भी काम करेगी ।


 ग्रामीण क्षेत्रों में वन धन  मित्र के काम को प्रोत्साहित देने का मुख्य उद्देश्य यह है कि , गांव के सभी जनजातियों के द्वारा  हर मौसम में बीज इकट्ठा करना  उसे बेचकर बिजनेस के रूप में परिवर्तित करना।  शासन के इस योजना का लाभ उठाकर  आदिवासियों के जिंदगी को  रोशन करने का काम करेगा और उनकी आर्थिक स्थिति को सुधारने का भी काम करेगा । आप  सभी जान रहे हैं ,जंगलों से प्राप्त शुद्ध  दाने बीज फल, फूल  उत्पाद कर  ऑर्गेनिक प्रोडक्ट बनाए जाते हैं   और  उसी शुद्ध ऑर्गेनिक प्रोडक्ट   को सभी लोगों तक  पहुंचाया जाता है और     इन सामानों के बिक्री से जो आय  होता है।  उसे  आदिवासी महिलाओं के लिए उनके परिवारों के लिए सशक्तिकरण  शिक्षा  और स्वास्थ्य बीमा जैसे  कार्य  के लिए उपयोग किया जाता है ,  हम यह कह सकते हैं कि  आदिवासियों के जरिए सभी लोगों   तक शुद्ध  प्रोडक्ट पहुंचाया जायेगा  । अभी सभी समूह के महिलाओं को जंगलों से ही प्राप्त  पेड़ पौधे के द्वारा औषधि तैयार करने के लिए भी  प्रोत्साहन किया जा रहा । जिसे समूह की महिलाएं जंगलों से  सभी तरह के   फल ,फूल ,बीज इकट्ठा करके  उसे शुद्ध उपयोगी प्रोडक्ट बना रहे हैं ।  जिसे  हम सभी लोग  प्रयोग भी कर रहे हैं , कुछ दशकों से  हम सभी लोग ऐसे  केमिकल रूप  औषधियों का  प्रयोग  कर रहे थे जिससे लोगों  के शरीर  में प्रभाव देखने को मिला और सभी लोग  आज केमिकल रुपी औषधि का प्रयोग करने में मजबूर हो गए हैं , हम सिर्फ औषधि के ही बारे में  बात  नहीं कर रहे हैं  हम उन तमाम चीजों के बारे में बात कर रहे हैं ,जो  सिर्फ केमिकल से ही बनाया जा रहा था । जिससे सभी लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ा इन सभी चीजों को देखते हुए शासन के द्वारा  ऐसी योजना तैयार की गई है । जिसमें सिर्फ जंगलों से ही  प्राप्त चीजों का प्रयोग कर  उन सभी वस्तुओं का निर्माण किया जाए जिसे  सभी लोग अपने दैनिक जीवन में प्रयोग कर रहे हैं और  करते आ रहे हैं।


 इस योजना के   उद्देश्य   से आप सभी को समझ आ ही गया होगा कि , इस योजना को तैयार करने का मुख्य उद्देश्य जंगलों को सुरक्षित रखना  उनसे प्राप्त  फल ,फूल  ,बीजो को  संरक्षित  रखना जिससे  सभी तरह के  शुद्ध प्रोडक्ट तैयार की जाए और सभी लोग केमिकल जैसे दुनिया से बाहर आ सके।


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