जानिए क्या है रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षक प्रशिक्षण
आइए जानें स्कूल मे ऐसी कौन सी योजनाएं चलाई जा रही है, जो बच्चों के लिए बहुत ही ज्यादा जरूरी है जहां एक माह से स्कूलों में सभी बच्चों को आत्मरक्षा बनाने के लिए सेल्फ डिफेंस का कार्यक्रम शुरू किया गया है , जिसके माध्यम से स्कूल के सभी बच्चों को आत्म रक्षक बना सके। बच्चों को आत्मरक्षाक बनाने के लिए समिति के द्वारा ऐसे बहुत से प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे स्कूल के बच्चे स्वयं का आत्म रक्षक कर सकें हमने सेल्फ डिफेंस कराटा सिखने वाले के कोच जिनके माध्यम से स्कूल के बच्चों को कराटे सीखाई जाएगी हमने उनसे बात की तो ,उन्होंने कहा कि सभी तरह की सुविधा सभी स्कूलों में बच्चों को दी गई है , साथ ही साथ हमने सोचा कि क्यों ना हम अब स्कूलों में सभी बच्चों को कराटा की भी ट्रेनिंग दे ,जो अभी सबसे ज्यादा जरूरी है ,बच्चों को करटा सीखाने के लिए कोरबा जिले के ही कोच शामिल हैं ,और सभी स्कूलों के बच्चों को कराटा सिखा रहे हैं,
हमने कोरबा जिला के अंतर्गत आने वाला पोड़ी ब्लॉक बांगो चर्रा के निवासी जिनका नाम
मनरखन सिंह अगरिया कराटा कोच
मनरखन सिंह अगरिया जो एक कराटा कोच है
और कराटे कोच के साथ-साथ स्काउट गाइड लीडर ,जिन्होंने हमें कराटा समिति के बारे में बताया कि अभी फिलहाल बच्चों को समिति के तरफ से महालक्ष्मी बाई सेल्फ डिफेंस सिखाया जा रहा है ताकि सभी स्कूल के बच्चे अपने आत्म रक्षा के लिए निपुण हो सके, हमने उनसे पूछा कि कोरबा जिला के कितने स्कूलों में सेल्फ डिफेंस कार्यक्रम शुरु हो चुका है ,तो उन्होंने हमें बताया कि लगभग पोड़ी ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले आधा से ज्यादा स्कूलों में यह कार्यक्रम शुरू हो चुका है। उनका कहना है कि ,आजकल ऐसे बहुत से घटनाएं घटित होती रहती हैं कि सभी लोग लोगों को अपने आत्म सुरक्षा के लिए स्वयं को एक ढाल की तरह बनाना चाहिए जिससे कि आने वाले समस्याओं से खुद निपट सके । यह कार्यक्रम बच्चों को सिखाना बहुत ही ज्यादा जरूरी था ?क्योंकि आज के दौर में ऐसे बहुत से घटनाएं घटित हो रही है, जिसे हम अनदेखा नहीं कर सकते कहा जाये तो इस करटे समिति के माध्यम से लड़कियों को सबल बनाने का प्रयास किया जा रहा है ।
लक्ष्मीबाई सेल्फ डिफेंस के बारे में स्कूल के बच्चे क्या कहते हैं आइए जानें
बच्चों का कहना है कि, लक्ष्मीबाई सेल्फ डिफेंस हमारे आत्म रक्षा के लिए बहुंत ही ज्यादा जरुरी था और हमें भी कराटे सीखने में अच्छा भी लग रहा है ,बच्चों का कहना है कि सभी स्कूलों में करटा सीखाई जानी चाहिए और आप सभी जान रहे हैं कि, अभी फिलहाल कराटा शिखना लड़कियों के लिए बहुत ही ज्यादा जरूरी है, कम से कम हम अपनी आत्मरक्षा तो कर पाएंगे अभी 2 दिन सीखने से हमें ऐसा महसूस होता है कि हम अपने तरफ आने वाली उन सभी समस्याओं का सामना हम स्वयं कर पाएंगे ,स्वयं का और दूसरों का आत्म रक्षक बन पाएंगे और आप सभी जान रहे हैं की आजकल तो दिनदहाड़े ऐसे बहुत से मामले सामने आ रहे हैं , इन सभी समस्याओं को देखते हुए स्कूलो में कराटा कोच शामिल किया गया है, बच्चों का कहना है कि उन्हें पहले कही भी आने जाने में भी संकोच होता था लेकिन, अब कराटा सीखने के बाद हम स्वतंत्र रूप से कहीं भी आ जा सकते हैं ,बच्चों का कहना है कि अगर हम कराटा सीखने में अच्छे से ध्यान दें तो हमें महिला उत्पीड़न जैसी सभी समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है , सेल्फ डिफेंस प्रशिक्षण सिर्फ खुद के लिए ही नहीं बल्कि सड़क पर चल रहे राहगीरों को समस्या से कैसे बचाया जाए इसके लिए भी है।
चलिए अब हम जानते हैं कि हमारी पोंडी ब्लॉक में लगभग कितने कराटे कोच हैं
हमारे पोंडी में लगभग १०० से ज्यादा
स्कूलों में कार्यरत हैं , कराटा कोच का मिशन 6 महीने में बच्चों को पूरी तरह से सक्षम आत्मनिर्भर बनाना इस योजना का मुख्य उद्देश्य है कि, सभी बच्चों को स्वयं की रक्षा के लिए तैयार करना रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण में कराटे जूडो की ट्रेनिंग दी जा रही है, इस प्रशिक्षण में पंच कैसे मारते हैं, कीक कैसे मारते हैं हाथ को छुड़ाना ,गर्दन को छुड़ाना किसी भी तरह के पकड़ को कैसे छुड़ाया जाए इसके बारे में भी करटा सिखाया जा रहा है ।
रानी लक्ष्मीबाई के द्वारा आत्म रक्षक सिखाने का उद्देश्य क्या है आइए जाने
स्कूलों में पढ़ने वाले लड़कियों को उनके विपरीत समस्याओ से निपटने के लिए आत्मासुरक्षा सिखाने का उद्देश्य है। आप सभी भली-भांति जान रहे हैं कि जब भी कोई लड़की कहीं आती जाती रहती है तो विपरीत कोई समस्या खड़ी हो जाती है । जिसका सामना करने में लड़कियां कमजोर महसूस करती हैं और घबरा जाती है , जिसके वजह से लड़कियों को सभी तरह के परेशानियों से जूझना पड़ता है ,सभी लड़कियों के परेशानियों को गंभीरता से लेने के बाद कोरबा जिले में एक कोच समिति बनाई गई जिसमें महिला व पुरुष दोनों सम्मिलित हैं , कराटा कोच ने हमें बताया कि समिति का गठन करने के लिए लगभग 2 साल लग गए एक समिति में 8 या उसे ज्यादा लोगों का होना बहुत ज्यादा जरूरी है, तब जाकर एक कराटा समिति बन पाया आज सभी स्कूलों में कराटा कोच के रूप में स्कूल के सभी बच्चों को कराटा सिखाया जा रहा है, तमाम सुरक्षा से संबंधित कराटा जूडो जैसे सभी तरह के दांव पेच सिखाए जाएंगे
इस तरह के आत्म रक्षक बहुत पहले से अगर बच्चों के लिए देना शुरू कर दिए रहते तो ,आज जितने भी लड़कियों को अकेले आने जाने में समस्या पैदा हो रही है, आज वह धीरे धीरे कम होने के अंतिम चरण में होती अगर आप दूसरी तरफ देखे तो बच्चों को डंडा चालना भी सिखाया जाता है। ताकि डंडा चलाना सीख कर भी स्वयं का का आत्म रक्षा कर सके ।
मेरा कहना यह है कि लड़कियों को आत्म रक्षक बनाने के लिए यह एक अच्छा प्रशिक्षण है, जिसके माध्यम से लड़कियां स्वयं आत्म रक्षक बन सकता है और अब लड़कियां खुद मनचलो को सबक सिखाने के लिए तैयार भी हो रही है
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